पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने गुरुवार को कहा कि उनका देश भारत के साथ थमी हुई समग्र वार्ता की बहाली चाहता है लेकिन ‘दूसरे पक्ष से आ रहे संकेत प्रोत्साहनकारी नहीं हैं।’ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रूक के साथ भारत-पाकिस्तान संबंधों के मौजूदा हालात और आगामी विदेश सचिव स्तर की वार्ता के बारे में हुई चर्चा के दौरान गिलानी ने यह टिप्पणी की।
गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र की शांति के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार ‘भारत के साथ समग्र वार्ता प्रक्रिया की बहाली के लिए ईमानदारी भरी कोशिशें कर रही है।’ बहरहाल, उन्होंने इस पर अफसोस जताया कि ‘दूसरे पक्ष की ओर से आ रहे संकेत प्रोत्साहनकारी नहीं रहे हैं।’ गिलानी के हवाले से उनके कार्यालय की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी संबंध ‘आतंकवादी गतिविधियों के चलते प्रतिकूल नहीं होने चाहिए’, जो (आतंकवादी) दोनों के साझा दुश्मन हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को क्षेत्र में टिकाऊ शांति के लिए ‘कश्मीर तथा जल विवाद सहित सभी अहम मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।’ गिलानी और हॉलब्रूक के बीच विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इन मुद्दों में अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों की ओर से तालिबान के खिलाफ छेड़े गए बड़े अभियान और अमेरिका-पाकिस्तान सामरिक वार्ता का विषय शामिल था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि वर्ष 2010 की शुरुआत में चर्चा के लिए जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन पर बातचीत के लिए कार्यक्रम तेज गति से निर्धारित किया जाएगा। इन बिंदुओं पर गत वर्ष अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की यात्रा के दौरान सहमति बनी थी।
गिलानी ने इस बात को रेखांकित किया कि दोनों पक्षों के बीच मौजूद गलत धारणाओं और गलतफहमियों को दूर करने के लिए यह जरूरी है कि सामरिक वार्ता में विश्वास विकसित किया जाए।
अफगानिस्तान में छेड़े गए अमेरिका के नए अभियान ‘ऑपरेशन मुश्तारिक’ के बारे में हॉलब्रूक और उनके दल से मिले ब्यौरे पर गिलानी ने अफगानिस्तान के हेलमंद क्षेत्र से शरणार्थियों और आतंकवादियों के पाकिस्तान के बलूचिस्तान और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में आ जाने के बारे में चिंता जाहिर की। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी बल और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहयोग बल इन चिंताओं को ध्यान में रखेगा और इस संबंध में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के साथ सहयोग और समन्वय को विस्तार दिया जाएगा।